शिखर की ओर अग्रसर हिंदी ग़ज़ल

17098431_10208288221030005_4268078898485174789_n

पुस्तक चर्चा

पुस्तक का नाम : बाद-ए-सबा (साझा ग़ज़ल संग्रह)

प्रकाशन वर्ष : 2017,  पृष्ठ  : 158
प्रकाशक  : मंगलम प्रकाशन,इलाहबाद  

 मूल्य  : 150.   संपादक : निर्मल नदीम

हाल ही में “बाद-ए-सबा”,साझा ग़ज़ल संग्रह, पढ़ने का शरफ़ मुझे हासिल हुआ। इस किताब की प्रति मुझे बेहतरीन शायर जनाब अब्बास सुल्तानपुरी साहब के ज़रिये प्राप्त हुई। इस पुस्तक में 15 शायरों की 10-10 ग़ज़लें हैं। मंगलम प्रकाशन,इलाहाबाद से प्रकाशित यह पुस्तक जनाब निर्मल नदीम साहब के संपादन में छपी है। निर्मल नदीम साहब सम्पादक होने के साथ साथ खुद एक अच्छे शायर और प्रकाशक भी हैं।
इसमें जहाँ रिवायती लबो-लहज़े में डूबी हुई शानदार ग़ज़लें नज़र आयीं वहीँ जदीद शायरी से लबरेज़ ग़ज़लें भी पढ़ने को मिलीं। ग़ज़लों का चयन अच्छा है मगर टाइपिंग मिस्टेक इतनी ज़ियादा है की बयान करना मुश्किल है। ज़ाहिर है कि प्रूफ ठीक से चेक नहीं हुआ बल्कि यूँ कहें कि शायद चेक ही नहीं हुआ।

किताब खोलते ही बेहतरीन शायर जनाब अब्बास सुल्तानपुरी साहब की ग़ज़ल से दिल खुश हो गया। मिसाल के तौर पर मतला और एक शेर आप भी देखिये :-
जिस्म से जान को रिहा कर दे।
या मुहब्बत मुझे अता कर दे।
आ गया हूँ तेरे निशाने पर ,
तीर नज़रों के अब रिहा कर दे। …….. पृष्ठ-1
अब्बास साहब को पहली बार हज़ल का निम्न शेर कहते देखा मैंने, हालाँकि शेर उम्दा हुआ है :-
मुसीबत को जब से संभाला है मैंने,
ससुर जी के चेहरे पे आयी ख़ुशी है। …. पृष्ठ-3

सादगी और सलासत से लबरेज़ जनाब अभिषेक कुमार सिंह के अशआर भी क़ाबिले-ज़िक्र है,मसलन :-
मर्ज़ का ही नहीं जब पता दोस्तो।
कोई कैसे करे तब दवा दोस्तो। …. पृष्ठ -13

निर्मल नदीम साहब की ग़ज़ल में तग़ज़्ज़ुल देखते ही बनता है,जैसे :-
फ़क़ीरी में जो अपनी ज़िन्दगी शाहाना रखते हैं।
जहाँ वाले उन्हीं का नाम तो दीवाना रखते हैं। … पृष्ठ-99

नितिन नायाब के मतले का निम्न शेर बड़ी खूबी से से तस्दीक़ करता है कि मुहब्बत में खुदा बसता है :-
नमाज़ियों को है मालूम मस्जिदों का पता।
बस एक इश्क़ है सबकी इबादतों का पता। पृष्ठ-101

आशावादी दृष्टिकोण रखता हुआ प्रमोद तिवारी हंस का ये शेर भी क़ाबिले-एहतराम है:-
हौसला पास गर नहीं होता।
चूमता मैं शिखर नहीं होता। …. पृष्ट-121

गिरधारी सिंह गहलोत जी का ये शेर भी खूब हुआ है हालाँकि इसमें ऐबे-तनाफ़ुर है ;-
किसी पत्थर से सर टकरा रहा हूँ।
क़सम देकर किसे समझा रहा हूँ। …. पृष्ठ-36

हिमकर श्याम जी का शेर भी क़ाबिले-ग़ौर है और अपने आप में निराला है :-
उँगलियाँ जो उठाता है सब की तरफ ,
रूबरू उसके भी आइना कीजिये। …. पृष्ठ-47

जनाब मोहसिन असर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए कहते हैं कि:-
बहुत ही नाज़ तेरी रहमतों पे है मौला,
नहीं है कोई भी शिकवा हमें मुक़द्दर से। …. पृष्ठ-75

अच्छे दिनों का इंतज़ार करते हुए थक कर चूर हो चुके सिवा संदीप अपनी पीड़ा कुछ यूँ बयान करते हैं ;-
छलोगे और अब सरकार कितना,
फ़क़त अच्छे दिनों की बात कब तक। …. पृष्ठ-143

इनके अतिरिक्त नितिन नायाब, मनोज राठौर मनुज, निर्मला कपिला,प्रदीप कुमार,संजीव क़ुरालीया, संजय मौर्य आदि की भी खूबसूरत ग़ज़लें इस संकलन में हैं। पुस्तक का मुख पृष्ठ खूबसूरत है। हिंदी की ग़ज़ल आहिस्ता आहिस्ता शिखर की ओर तेज़ी से जा रही है, यह कहना फख्र की बात है। सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई।

575274_365024393552716_689915819_n ✍   कुँवर कुसुमेश

काव्य रचनाओ के लिए मुझे इस लिंक पर follow करे. धन्यवाद.

http://himkarshyam.blogspot.in/

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s