उम्र से परे एक सितारा

लीजेंड के amitabh-bachchanमायने क्या हैं? यह समझना हो तो अमिताभ की शख्सियत को समझिए. व्यक्तित्व की खूबियां ही किसी साधारण इंसान को लीजेंड बना देती हैं. अमिताभ बेमिसाल हैं. उनके व्यक्तित्व में कुछ ऐसी खूबियां हैं जो उनको औरों से अलग करती है. अनुशासन, धैर्य, ऊर्जा और अदम्य उत्साह उनकी खूबियां हैं. सादगी, सहजता और संवेदनशीलता जैसे गुण उनको महान बनाते हैं.अमिताभ का जीवन उनके नाम की सार्थकता सिद्ध करता है. जो आभामंडल अमिताभ का है वह शायद ही किसी और अभिनेता का हो. समय और दौर के अनुरूप  अमिताभ खुद को ढालते रहे हैं. वह आज भी उतने ही ऊर्जावान हैं जितना पहले हुआ करते थे. उनका जादू आज भी बरकरार है. अमिताभ उम्र से परे हैं. 74 की उम्र में भी वह सबके चहेते हैं. उनके जलवे आज भी बरकरार हैं.  हालिया फिल्मों में ‘पीकू’ और ‘पिंक’ ने क्रिटिक्स के साथ-साथ दर्शकों की भी खूब तारीफें बटोरीं.

 मुंबई के जूहू बीच से कुछ दूरी पर ही अमिताभ का बंगला जलसा स्थित है. घर के बाहर लोगों का हुजूम लगा रहता है और मौका मिलते ही अमिताभ घर से निकल कर अपने फैंस का अभिवादन करते हैं. मुंबई घूमने आए पर्यटकों के लिए बिग बी का घर देखना अनिवार्य है. 47 वर्षों से हिंदी फ़िल्म जगत में सक्रिय अमिताभ कई हिट और यादगार फ़िल्में दे चुके हैं. इस दौरान उन्होने कई दौर देखे जो चुनौतीपूर्ण थे. उनकी सफलता को तो सब देखते हैं, लेकिन इस सफलता के पीछे छिपा हुआ संघर्ष नजर नहीं आता. फिल्मों में आने के पहले भी अमिताभ ने संघर्ष किया और फिल्मों में आने के बाद भी. उन्होंने जो फिल्में की वे बुरी तरह फ्लॉप हो गईं. वॉयस नैरेटर के तौर पर पहली फिल्म ‘भुवन शोम’ थी लेकिन अभिनेता के तौर पर उनके करियर की शुरुआत फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से हुई. ‘जंजीर’ के हिट होने के पहले तक उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. जंजीर’ उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई. इसके बाद उन्होंने लगातार हिट फिल्मों की झड़ी तो लगाई ही, इसके साथ ही साथ वे हर दर्शक वर्ग में लोकप्रिय हो गए और फिल्म इंडस्ट्री के शहंशाह बन गए.

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर उन्हें 3 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है. इसके अलावा 14 बार उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुका है. फिल्मों के साथ साथ वे गायक, निर्माता और टीवी प्रस्तोता भी रहे है. जिस अमिताभ बच्‍चन के आवाज की पूरी दुनिया कायल है, एक समय था जब उनकी आवाज उनके करियर में रोड़ा बन रही थी और उन्‍हें नकार दिया गया था लेकिन बाद में उनकी आवाज ही उनकी ताकत बनी. करियर के इस मुकाम पर पहुंचने के बाद भी वो बेहद विनम्र और शान्त हैं. यही खास बात है जो उनकी शख्सियत को और भी निखार देता है.

1982 में फिल्म कुली के सेट पर अमिताभ को पेट में गंभीर चोट लगी थी. डॉक्टरों ने बिग बी की सर्जरी की, मगर सेहत में सुधार नहीं हुआ, और वो मरणासन्न स्थिति में पहुंच गए. इलाज के दौरान बिग बी को खून की सख्त ज़रूरत पड़ी. उन्हें खून देने के लिए उनके चाहने वालों का तांता लग गया. 200 लोगों ने खून दिया. 60 बोतल खून चढ़ा. उस समय देशभर में अमिताभ की सेहत के लिए मंदिरों में दुआएं मांगी जाती रहीं. अस्पताल के बाहर फैंस की लंबी-लंबी लाइन लगी रहती थी. उनके फैंस ने हवन, पूजा जैसे तमाम उपाय किए. ऑपरेशन सफल रहा. वह स्वस्थ भी हुए और पुनः काम पर भी लौटे. यह सब फैंस की दुआओं और उनके हौसले और हिम्मत की बदौलत सम्भव हो पाया.

अमिताभ वह ध्रुव तारा है जो सत्तर के दशक से देश के सिनेमा पर चमक रहा है. पहले एंग्री यंग मैन था, अब वाइज ओल्ड मैन. उम्र के मुताबिक अमिताभ बच्चन ने अपने किरदार बदले, अपना अंदाज बदला. इसीलिए उन्हें सदी का महानायक कहा जाता है. अमिताभ वक़्त के साथ-साथ स्‍वयं को बदलते रहे. मैडम तुसाद संग्रहालय में बनी मोम की मूर्ति बिग बी के लोकप्रियता को देश और विदेश में दर्शाती है. अमिताभ पहले ऐसे एशियाई हैं जिनकी मूर्ति तुसाद संग्रहालय में बनी है. अमिताभ का नाम बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी जानते हैं. अमिताभ के फैंस 70 के दशक से ही चले आ रहे हैं. सोशल मीडिया अब लोकप्रियता मापने का भी बैरोमीटर है. इस पैमाने पर भी वह सर्वश्रेष्ठ हैं. सोशल मीडिया पर भी वह लंबे समय से सक्रिय हैं. बिग अड्डा से शुरू हुआ सफर ट्विटर और टमब्‍लर तक पहुंच चुका है. अमिताभ फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम का जमकर इस्‍तेमाल करते हैं और यही कारण है कि दोनों सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उनके फैंस की संख्‍या लाखों-करोड़ों में है. वे अपने प्रंशसको को कभी नहीं निराश करते हैं और पल-पल की घटनाओं को वे इन माध्‍यमों के जरिए शेयर करते हैं. अपने प्रशंसकों से दिलचस्प चर्चाएं करते हैं. अपने निजी सुख-दुख की बातें भी शेयर करते हैं. अमिताभ बच्‍चन ऐसे सेलिब्रिटी हैं, जो अपने ट्विट के साथ क्रामांक भी दर्ज करते हैं.

यह उनके व्यक्तित्व का जादू ही है कि वह लोगों को खुद से जोड़ लेते हैं. हर कोई उनका कायल हो जाता है. हर प्रशंसक को यही लगता है कि शोहरतों की ऊंचाईयों पर चमकने वाला यह सितारा उनका अपना है. उनके बीच का है. काम के प्रति उनका समर्पण देखने और सीखने लायक है. अमिताभ ने अपने प्रशंसकों को बहुत कुछ दिया है. हम तो उनके जन्मदिन पर ढेर सारी दुआएँ और शुभकामनाएँ ही दे सकते हैं.

✍ हिमकर श्याम

(चित्र गूगल से साभार)

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http://himkarshyam.blogspot.in/

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